जब रक्षक ही बन जाये भक्षक तो आम जनता क्या करे, जानें क्या है पूरा मामला

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फतेहपुर : भू माफियाओं की मदद में हर वक़्त खड़े सत्ताधारी नेताओं ने जनसेवा व विकास कार्यों को छोड़ जमीनों पर कब्जा करने में सत्ता की पूरी ताकत झोंक रखी है। इसी का नतीजा है कि जनसमस्याओं व विकास कार्यों से किनारा काटे कई जनप्रतिनिधियों ने केवल मौरंग व मिट्टी के खनन,अवैध कब्जे तथा विवादित जमीनों की खरीद-फ़रोख़्त जैसे कार्यों में अपना पूरा दिमाग लगा रखा है। सत्ताधारियों के गुर्गे उनके इशारों एवं शह पर घूम-घूम कर बेशकीमती जमीनों पर नाजायज़ तरीकों से कब्जा कर रहे हैं।

भू-माफियाओं व सत्ताधारियों की आपसी जुगलबंदी हर रोज नए गुल खिला रही है। कहीं रात के अंधेरे में तो कहीं दिन के उजाले में जमीनों पर कब्जे किए जा रहे हैं। इनकी जानकारी होने के बावजूद सत्ता के दबाव के चलते खाकी भी चुप्पी साधे बैठी है। कई मामले तो ऐसे हैं जिनमें पीड़ितों को ही पुलिस ने कब्जों के दौरान उठाकर थानों में बंद कर दिया और कब्जा होते ही उन्हें छोड़ दिया।

जिस तरह से योगीराज में सत्ताधारी ही भूमाफिया बनकर जनता का खून चूसने में लगे हैं, उससे आख़िर लोग किस सुशासन की कल्पना करें? रामराज्य का सपना दिखा सूबे की सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी की सरकार के कुछ नेता ही जनता के शोषक बन गए हैं। एक मजेदार बात और है कि भाजपा के एक अनुसांगिक संगठन का बड़ा पदाधिकारी भी गुल खिला रहा है।

रात के अंधेरे से लेकर दिन के उजाले तक में उसके घर काम कराने के लिए लोगों की भीड़ देखी जा सकती है। थानों में पोस्टिंग से लेकर सिफ़ारिशी फोन, शस्त्र लाइसेंस रिन्यू करवाने एवं जमीनों पर कब्जे, राजस्व एवं प्रशासनिक कार्यों को निपटाने के लिए मानो उसने कंट्रोल रूम ही खोल रखा है। जमीन के कई मामलों में उनका नाम तेजी से आया है और यह हकीकत भी है कि हर काम का बयाना लेने में उनकी ग्रेडिंग किसी भी सत्ताधारी जनप्रतिनिधि से कम नहीं है, ऐसा वह दर्शा रहे हैं ! अधिकारियों पर कार्रवाई का भय दिखा दबाव बनाने का भी काम उसके द्वारा किया जाता है।

क्षेत्र के ज्वाला गंज इलाके में एक गरीब परिवार की जमीन पर कब्जे के पीछे भी एक विधायक एवं संघ के इन्हीं महाशय का नाम आ रहा है जिसने भू-माफियाओं से सांठगांठ कर जमीन पर कब्जा करने का खेल खेलना शुरू किया है। ख़बर है कि ज्वाला गंज क्षेत्र में जमीन में कब्जे का काम इस समय भी शुरू है और पुलिस मूकदर्शक मात्र बनी हुई है, जबकि न्याय की आस में अफसरों की चौखटों पर पीड़ित परिवार दस्तक दे दर-दर की ठोकरें खाता घूम रहा है।

जिस तरह से चारों तरफ भ्रष्टाचार, भय-दहशत व कानून व्यवस्था का बुरा हाल है, भू माफिया सिर उठाए घूम रहे हैं। ऐसे में लोग न्याय की कल्पना कैसे और किस से करें? सत्ताधारियों की चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं ! चाहे मौरंग खनन के मामले रहे हों, मिट्टी खनन,ओवरलोडिंग,ओवरडंपिंग या फिर जमीनों पर कब्जे के मामले हों, सत्ताधारियों के नाम घूम फिर कर सामने आते रहे हैं।

इनके द्वारा पूर्ववर्ती सरकारों में इन्हीं मुद्दों पर चिल्ल-पों मचाने एवं अपनी सरकार में मौन धारण करना इनकी बेगुनाही के सबूत तो नहीं हैं। सत्ता से जुड़े कई जनप्रतिनिधियों ,नेताओं एवं उनके गुर्गों ने भाजपा सरकार की प्रतिष्ठा को ही दांव पर लगा दिया है ! जिले में चल रही लूट-घसोट एवं जमीनों पर नाजायज कब्जों को रोकने के लिए ज़िम्मेदार ही जब भू-माफियाओं की गोद में जाकर बैठ जाएं तो आम जनता किसकी ओर निहारे और उसे न्याय कौन देगा?

एक बात तो तय है कि सत्ता और सरकारें आती जाती रहती हैं, जिस तरह से सत्ताधारियों ने नाजायज़ कामों में अति कर दी है, उससे आने वाले समय में सत्ता के शीर्ष तक पहुँचाने वाली यही आज की मजबूर जनता उन्हें सबक सिखाएगी जरूर।

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