लापता भारतीय-अमेरिकी किशोरी फ्लोरिडा में सुरक्षित मिली

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 भारतीय-अमेरिकी किशोरी तन्वी मारुपल्ली, जो 75 दिनों से अधिक समय से लापता थी, फ्लोरिडा में सुरक्षित पाई गई और अपने परिवार के साथ फिर से मिल गई है। टेक उद्योग में बड़े पैमाने पर छंटनी के बीच अपने परिवार को निर्वासित किए जाने के डर से 15 वर्षीय अरकंसास में अपने घर से कथित तौर पर भाग गई थी।
उसे आखिरी बार 17 जनवरी को कॉनवे जूनियर हाई स्कूल के पास देखा गया था।
कोनवे के पुलिस प्रमुख विलियम टापले ने कहा, आज अच्छा दिन है। तन्वी मारुपल्ली अपने परिवार के साथ सुरक्षित घर पर है, ठीक उसी जगह जहां उसे अपने परिवार के साथ होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि तन्वी करीब 22 जनवरी को कई मील पैदल चलने के बाद कैनसस सिटी पहुंची थी, जहां से उसे अंतिम बार डेविस स्ट्रीट पर देखा गया था।
उसने एक झूठी पहचान से एक बेघर आश्रय घर में शरण ली और फ्लोरिडा में जाने से पहले लगभग दो महीने के लिए कैनसस सिटी क्षेत्र में रही जहां वह एक ऐसे मकान में रही जहां कोई नहीं रहता था।
टापले ने कहा, पुस्तकालय के लिए उसका प्यार आखिरकार उसकी खोज का कारण बना।
कॉनवे पुलिस विभाग (सीपीडी) को 29 मार्च को टाम्पा निवासी से एक गुप्त सूचना मिली, जिसने उसे पुस्तकालय में देखा था और ऑनलाइन एक लापता व्यक्ति पोस्ट से उसकी पहचान की थी।
उसे सुरक्षात्मक हिरासत में ले लिया गया और उसकी पहचान की पुष्टि करने के लिए उससे कई सवाल पूछे गए।
तन्वी के माता-पिता का मानना है कि परिवार की अप्रवासन स्थिति के कारण उनकी बेटी भाग गई।
उनके पिता, पवन रॉय मारुपल्ली ने सीपीडी को सूचित किया कि उन्हें अब अपनी नौकरी खोने का खतरा नहीं है और इस समय देश छोडऩा चिंता का विषय नहीं है।
तन्वी को परिवार के साथ खोजने के लिए समुदाय ने अभियान चलाए और खोज दलों का आयोजन कर अथक परिश्रम किया, यहां तक कि 5,000 डॉलर के इनाम की भी घोषणा की।
सीपीडी ने कहा कि उन्होंने यूएस मार्शल सर्विस और नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन से इस जांच में उनकी सहायता के लिए कहा था।

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