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त्रिवेंद्र रावत व महाराज ने देवस्थानम के फैसले का स्वागत किया

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देहरादून : मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मंगलवार को देवस्थानम बोर्ड की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखने के उत्तराखंड उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है। धार्मिक मामलों के मंत्री सतपाल महाराज ने भी फैसले का स्वागत किया। दूसरी ओर, फैसले की घोषणा के तुरंत बाद, याचिकाकर्ता सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट करते हुए स्पष्ट किया कि वह उच्च न्यायालय के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देंगे। फैसले के बाद आयेाजित प्रेसवार्ता में रावत ने चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड पर उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने दावा किया कि भविष्य की आवश्यकताओं, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की दृष्टि से बोर्ड का गठन किया गया है। पिछले वर्ष 36 लाख श्रद्धालु चारधाम यात्रा पर आए। आने वाले समय में इसमें बहुत वृद्धि होने की सम्भावना है। इसलिए इतनी बड़ी संख्या मे आने वाले यात्रियों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है।

माननीय उच्च न्यायालय ने एक तरह से राज्य सरकार के निर्णय पर अपनी मुहर लगाई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि तीर्थ पुरोहित और पण्डा समाज के लोगों के हक हकूक और हितों को सुरक्षित रखा गया है। जहां भी धर्म और संस्कृति का विषय होता है, वहां परम्पराओं का बहुत महत्व है। हमने चारधाम के संबंध में सभी परम्पराओं का बनाए रखा है। सैंकड़ों सालों से स्थानीय तीर्थ पुरोहितों और पण्डा समाज ने चारधाम की पवित्र परम्पराओं का संरक्षण किया है। विपरीत परिस्थितियों के होने पर भी दूर दूर से आने वाले श्रद्धालुओं का ध्यान रखा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने स्वयं देखा है कि बरसात में रास्ते बंद हो जाने पर किस प्रकार तीर्थ पुराहितों ने श्रद्धालुओं के रूकने, खाने आदि की व्यवस्थाएं की हैं। इसी भावना के कारण उत्तराखण्ड को देवभूमि का मान मिलता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तीर्थ पुराहितों ने यहां की परम्पराओं का संरक्षण किया है और देवभूमि का मान बढ़ाया है, उनके हितों की रक्षा, सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। चारधाम देवस्थानम बोर्ड को लेकर किसी प्रकार का संशय नहीं होना चाहिए। राज्य गठन के बाद चारधाम देवस्थानम बोर्ड का गठन सबसे बड़ा सुधारात्मक कदम है। माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय को किसी की जीत हार से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। यह राजनीतिक विषय नहीं है। आने वाले समय में चारधाम देवस्थानम बोर्ड, चारधाम यात्रा के प्रबंधन की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण होने जा रहा है। 

कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने टिप्पणी की कि हाईकोर्ट के फैसले के जरिए याचिकाकर्ता सुब्रमण्यम स्वामी को उचित जवाब मिल गया है। उधर रूलक संस्था के अध्यक्ष अवधेश कौशल ने भी फैसले का स्वागत किया। यह उल्लेखनीय है कि कौशल ने उच्च न्यायालय में देवस्थानम बोर्ड के गठन के लिए सरकार के उपाय का बचाव किया था। लोकसंहिता से बात करते हुए, उन्होंने दावा किया कि चार धाम तीर्थ स्थल निजी मंदिर नहीं हैं और इसलिए सरकार का उन पर नियंत्रण सही व उचित कदम है । उन्होंने यह भी दावा किया कि केरल में पद्मनाभ मंदिर के संबंध में हाल के फैसले में तथ्य बहुत अलग थे और उस मामले में सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय चारधाम के लिए लागू नहीं होता।

दूसरी ओर, हाई कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए, याचिकाकर्ता सुब्रमण्यम स्वामी ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का इरादा जताया। निर्णय के तुरंत बाद एक ट्वीट में, स्वामी ने कहा कि वह और उनकी कानूनी टीम फैसले की प्रति का इंतजार करेंगे। स्वामी ने यह भी कहा हाईकोर्ट ने उनके कई तर्कों को वाजिब मानकर ही सरकार के मूल अधिनियम में कुछ हद तक संशोधन किया है।

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