चमोली : ग्रामीणों ने ली राहत की सांस, नरभक्षी गुलदार को मारने की मिली अनुमति

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नीरज कंडारी

चमोली : नारायणबगड़ के अंतर्गत गैरबारम गाँव सहित आसपास के तमाम गांव के लोगों की दूसरी रात भी गुलदार की दहशियत में थी । हालांकि वन विभाग से ग्रामीणों की जानहिफाजद के लिए गुलदार को जिंदा या मुर्दा पकड़ने के अनुरोध के बाद इस राज्य के दोनों प्रख्यात शिकारीयों के क्षेत्र में पहुंच जाने के बाद क्षेत्र के लोगों ने कुछ राहत की सांस जरू ली है।

सोमवार को गैरबारम में 11 वर्षीय दृष्टिका को आदमखोर गुलदार सांय करीब 7 बजे घर के पास से उठा कर ले गया था और कुछ दूर खेतों के पास ही उसे मार कर आधे से अधिक खां गया था। इसके बाद मंगलवार को राजस्व पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवा कर बच्ची के शव को परिजनों को सौंप दिया था।और मंगलवार की ही देर सांय उस के शव का गमगीन माहौल के बीच दाह संस्कार कर दिया। सोमवार की शाम की वारदात का असर मंगलवार की शाम को भी देखने को मिला।गैरबारम,मलतुरा गांव सहित आसपास के तमाम अन्य गांव से आज मिली जानकारी के अनुसार मंगलवार को शाम ढ़लते हैं।

अधिकांश लोग अपने घरों में दुबक गए। जबकि छोटे बच्चों को तो धूप छुपने से काफी पहले ही घरों के अंदर कैद कर दिया गया। इस के अलावा खेतों में भी महिलाएं अकले जाने से बचती रही, जरुरी काम पड़ने पर वें झुंडो में ही खेतों में आ- जा रहे हैं। आदमखोर गुलदार के द्वारा एक माह के अंदर दो बच्चों को अपना निवाला बना देने के बाद इस क्षेत्र में गुलदार की दहशियत कम होने का नाम ही नही ले रही हैं।

हालांकि बद्रीनाथ वन प्रभाग गोपेश्वर के प्रभागीय वनाधिकारी आशुतोष सिंह की ठोस शिफारिश पर मंगलवार की देर सांय ही प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव/मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक राजीव भस्तरी ने कुछ सर्तों के साथ गुलदार को आदमखोर घोषित कर पकड़ने, मारने के लिए एक माह तक का समय देते हुए आदेश जारी कर दिए हैं। इसके बाद अब आदमखोर को मारने की प्रकृया में वन विभाग ने तेजी लानी शुरू कर दी है।

डीएफओ आशुतोष सिंह ने बताया की पीड़ित परिवार को मंगलवार को ही 90 हजार रुपए का चैक दें दिया गया हैं। अवशेष 2 लाख 10 हजार रुपए जल्द ही दे दिए जाएंगे।पूछने पर डीएफओ ने बताया की 29 मई को मलतुरा में गुलदार के द्वारा मारे गए 4 वर्षीय बच्चे रमेश के पिता प्रेम बहादुर को 90 हजार रुपए पहले ही दिए जा चुके हैं। जबकि शेष राशि के लिए प्रक्रिया गतिमान है।

उन्होंने बताया की दोनों शिकारी लखपत सिंह रावत गैरसैंण से एवं ज्वाॅय वकील पौड़ी से अपने एक-एक सहयोग के साथ गैरबारम मंगलवार की देर शाम ही पहुंच गए थे। बुधवार को दोनों ही शिकारीयों ने घटनास्थल व उसके आसपास के इलाकों का गहन निरीक्षण कर वन विभाग के स्थानीय कार्मिकों को आवश्यक जानकारी प्राप्त की। बताया की मलतुरा में पहले से ही दो पिंजरे लगाए गऐ हैं। उनमें से एक को अब वहा से गैरबारम गांव में लगाने के साथ ही एक अन्य पिंजरे की व्यवस्था कर उसे भी लगाने के विभाग के स्थानीय अधिकारियों, कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं।

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