आधुनिक विधियों से परंपरागत खेती के प्रोत्साहन की योजना

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अब सरकार के प्रयासों से परंपरागत खेती को दिया जायेगा अधिक महत्व- कोरोना वायरस संक्रमण के चलते अपने गांव लौटे प्रवासियों को स्थानीय स्तर पर ही स्वरोजगार उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का बेड़ा उठाया है उत्तराखण्ड की त्रिवेन्द्र सिंह रावत सरकार ने जिसके लिए अब यहां के युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही परंपरागत खेती तथा उद्यानिकी से जोड़ने का निर्णय लिया है। इसके लिए इन स्थानीय उत्पादों के खरीद के लिए उत्तराखण्ड सरकार ने पंतजलि योगपीठ का भी सहयोग लिया है जिससे कि पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि को स्वरोजगार के रूप में अपनाने वाले युवाओं के सामने अपने उत्पादों के विपणन की समस्यायें ना आने पायें क्योंकि होता यह है कि पर्वतीय क्षेत्रों के विषम भौगोलिक वातावरण तथा सड़क मार्ग तक ढुलान तथा सड़क से बाजार तक अपने उत्पादों को पंहुचाने मे किसानों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है।और अपने उत्पादों को बाजार तक पंहुचानें में ही उत्पादकों का बहुत सारा पैसा व्यय हो जाता है।इसका एक उदारहण मुझे जोशीमठ विकासखण्ड में देखने को मिला जहां उत्तम क्वालिटी का पहाड़ी आलू उगता है।

लेकिन यहां आलू उत्पादकों की मेहनत का फायदा बिचौलिए उठा ले जाते हैं किसानों से दो या तीन रुपये किलो आलू खरीदकर बिचौलिए इसे सीधे बिजनौर तथा दिल्ली अथवा देहरादून की मण्डियों तक पंहुचाते हैं तथा यहां से होकर यह पहाड़ी आलू फिर से जोशीमठ आदि बाजारों में पंहुचता है तथा तीस रुपये से अधिक मूल्य पर उसी जोशीमठ आदि क्षेत्रों मे बिकता है अब आप सोचिए किसान ने कितना कमाया तथा बिचौलिए कितना कमा के चलते बने.यह तो एक उदारहण मात्र है पर्वतीय क्षेत्रों में औषधीय गुणो से युक्त दालें होती हैं मसाले होते हैं इसके अतिरिक्त दालचीनी गिलोय मुलेठी बहुतायत में होता है लेकिन सबसे बड़ी समस्या आती है स्थानीय उत्पादकों के सामने विपणन हेतु बाजार की उपलब्धता की और इस बार प्रदेश सरकार ने इसका जिम्मा सौंपा है पतंजलि योगपीठ को और इसी संदर्भ में विगत दिवस मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने पंतजलि योगपीठ के आचार्य बालकृष्ण के साथ बैठक भी की है।

इसके साथ ही हल्दी अदरक, गिलोय, मुलेठी, हींग आदि की प्रोसेसिंग कर उत्पादक इसका अच्छा मूल्य प्राप्त कर सकते हैं।वहीं बैठक में पतंजलि योगपीठ के आचार्य बालकृष्ण ने किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से किसानों को अपने उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने में पंतजलि योगपीठ के द्वारा हर संभव सहयोग का आश्वासन भी दिया गया।

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