दुनियाभर में कोरोना महामारी से संक्रमित होने वालों की तादाद लगभग 1.44 करोड़ से भी अधिक हो चुकी है, वहीँ जबकि इस संक्रमण के चलते 06 लाख से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवाईं है। विकट होती जा रही ऐसी परिस्थितियों को नियंत्रण में लेन के लिए अब कोरोना वायरस की वैक्सीन का होना नितांत आवश्यक हो गया है।
दुनियाभर के देशों के वैज्ञानिक इस कोशिश में अपने पुरे अनुभव को झोंके हुए हैं। वहीँ अगर बात की जाए घरेलू फार्मा कंपनियों की तो भारत बायोटेक, सीरम इंस्टिट्यूट, जायडस कैडिला, पैनेशिया बायोटेक, इंडियन इम्यूनोलॉजिकस, मायनवैक्स और बायोलॉजिकल ई कोविड-19 का टीका तैयार करने की कोशिश में जुटी हुईं हैं ।
भारत की गिनती जेनेरिक दवाओं और वैक्सीन के दुनिया में सबसे बड़े मैन्युफैक्चरर्स में होती है। देश में वैक्सीन बनाने वाली आधा दर्जन से ज्यादा बड़ी कंपनियां हैं। इसके अलावा कई छोटी कंपनियां भी वैक्सीन बनाती हैं। ये कंपनियां पोलियो, मैनिनजाइटिस, निमोनिया, रोटावायरस, बीसीजी, मीजल्स, मंप्स और रूबेला समेत दूसरी बीमारियों के लिए वैक्सीन बनाती हैं। कोवैक्सीन, भारत बायोटेक: इसका विनिर्माण कंपनी के हैदराबाद कारखाने में किया जाएगा। कंपनी ने पिछले सप्ताह मानव पर क्लिनिकल ट्रायल शुरू किया है। पहले और दूसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल की अनुमति मिली है।
एस्ट्रजेनेका, सीरम इंस्टीट्यूट वैक्सीन: फिलहाल कंपनी एस्ट्रजेनेका ऑक्सफोर्ड वैक्सीन पर काम कर रही है। कंपनी की अगस्त, 2020 में भारत में मानव परीक्षण शुरू करने की योजना है। इसका तीसरे चरण का क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है। जाइकोव-डी,
जायडस कैडिला वैक्सीन: ट्रायल के दौरान टीका प्रभावी साबित होता है तो टीका उतारने में सात माह लगेंगे। कंपनी अध्ययन के नतीजों के आधार पर काम करेगी। कंपनी को क्लिनिकल ट्रायल सात माह में पूरा करने की उम्मीद।
पैनेशिया बायोटेक वैक्सीन: टीका विकसित करने के लिए अमेरिका की रेफैना के साथ करार किया है। कंपनी की आयरलैंड में एक संयुक्त उद्यम स्थापित करने की योजना है। 4 करोड़ से अधिक खुराक अलगे साल तक आपूर्ति की जा सकेंगी। प्री क्लिनिकल ट्रायल जारी है।
इंडियन इम्यूनोलॉजिकस वैक्सीन: टीका विकसित करने के लिए ऑस्ट्रेलिया के साथ करार किया है। कंपनी ऑस्ट्रेलिया की ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी के साथ मिल कर रिसर्च करेगी। अभी प्री क्लिनिकल ट्रायल जारी है।
मायनवैक्स वैक्सीन: 18 माह में टीका विकसित करने की कंपनी की योजना है। कंपनी की दो दर्जन टीम टीका विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी ने 15 करोड़ की राशि के लिए बीआईआरएसी को अर्जी दी है। फिलहाल प्री क्लिनिकल ट्रायल जारी है।