दिल्ली में शराब होगी महंगी, डिस्काउंट खत्म? केजरीवाल सरकार के फैसले का क्या होगा असर

दिल्ली में शराब होगी महंगी, डिस्काउंट खत्म? केजरीवाल सरकार के फैसले का क्या होगा असर
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दिल्ली में शराब बिक्री की पुरानी व्यवस्था दोबारा बहाल होने से शराब के सरकारी ठेके फिर से खुलने वाले हैं। उपराज्यपाल वीके सक्सेना द्वारा नई आबकारी नीति के क्रियान्वयन की सीबीआई जांच की सिफारिश के बाद अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली दिल्ली सरकार ने राजधानी में शराब बिक्री की पुरानी व्यवस्था को फिर से लागू करने का फैसला किया है। सरकार के इस फैसले के बाद 1 अगस्त से केवल सरकारी ठेकों के माध्यम से ही शराब बेचने का निर्देश दिया गया है।
केजरीवाल सरकार के इस फैसले के चलते दिल्ली में चल रहीं 468 निजी शराब की दुकानें 1 अगस्त से उनके लाइसेंस की अवधि समाप्त होने के चलते बंद हो जाएंगी। नई आबकारी नीति के तहत की अवधि को 30 अप्रैल के बाद दो बार दो-दो महीने के लिए बढ़ाया गया था। यह अवधि 31 जुलाई को समाप्त होगी। आबकारी नीति 2021-22, जिसे 31 मार्च के बाद दो बार दो-दो महीने की अवधि के लिए बढ़ाया गया था, वो 31 जुलाई को समाप्त हो जाएगी।
माना जा रहा है कि दिल्ली में निजी शराब की दुकानें बंद होने के चलते शराब खरीद पर मिलने वाले ऑफर और डिस्काउंट भी बंद हो सकते हैं और शराब फिर से महंगी हो सकती है।
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शनिवार को बताया कि दिल्ली सरकार ने नई आबकारी नीति को फिलहाल वापस लेने का फैसला किया है और अब शराब की बिक्री केवल सरकारी दुकानों से करने का निर्देश दिया गया है। सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली के मुख्य सचिव को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया गया है कि शराब अब केवल सरकारी दुकानों के माध्यम से बेची जाए और कोई अराजकता न हो।
एक आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, वित्त विभाग ने आबकारी आयुक्त को 17 नवंबर, 2021 से नई आबकारी नीति लागू होने से पहले दिल्ली सरकार के चार निगमों के प्रमुखों के साथ उनके द्वारा संचालित शराब की दुकानों के विवरण के लिए समन्वय करने का निर्देश दिया है।
पुरानी व्यवस्था के तहत चार सरकारी निगम – दिल्ली राज्य औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास निगम , दिल्ली पर्यटन और परिवहन विकास निगम , दिल्ली उपभोक्ता सहकारी थोक स्टोर और दिल्ली राज्य नागरिक आपूर्ति निगम – अधिकांश शराब की दुकानें चला रहे थे। चारों सरकारी निगम दिल्ली में कुल 864 में से 475 शराब की दुकान चलाते थे, जबकि 389 लाइसेंस निजी स्टोर, व्यक्तियों के पास थे। आबकारी नीति 2021-22 से पहले शहर में दुकानों पर दिल्ली सरकार द्वारा शराब की खुदरा बिक्री बंद कर दी गई थी।
नई नीति के तहत निजी फर्मों को खुली बोली के जरिए 849 शराब ठेकों के लाइसेंस जारी किए गए। शहर को 32 क्षेत्रों में विभाजित किया गया था, जिनमें से प्रत्येक में अधिकतम 27 विक्रेता थे। व्यक्तिगत लाइसेंस के बजाय, बोली क्षेत्रवार की गई थी और प्रत्येक बोलीदाता को अधिकतम दो क्षेत्रों के लिए बोली लगाने की अनुमति दी गई थी।
नई आबकारी नीति में पारदर्शी तरीके से जारी किए लाइसेंस
मनीष सिसोदिया ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि पुरानी आबकारी नीति में कई सरकारी शराब की दुकानें थीं और ऐसी दुकानों में भारी भ्रष्टाचार हुआ करता था, लेकिन नई आबकारी नीति के साथ इसे रोक दिया गया। उन्होंने कहा कि नई आबकारी नीति में खुली निविदाओं के माध्यम से पारदर्शी तरीके से लाइसेंस जारी किए गए। सिसोदिया ने कहा कि पुरानी व्यवस्था में सरकार को 6,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता था, जबकि नई आबकारी नीति से सरकार को पूरे वर्ष में 9,500 करोड़ रुपये का राजस्व मिलना तय था।
गौरतलब है कि दिल्ली के उपराज्यपाल ने इस महीने की शुरुआत में आबकारी नीति के कार्यान्वयन में नियमों के कथित उल्लंघन और प्रक्रियात्मक खामियों की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। उन्होंने दिल्ली के मुख्य सचिव को कथित अनियमितताओं में आबकारी विभाग के अधिकारियों की भूमिका की जांच के साथ-साथ बोली के माध्यम से खुदरा शराब लाइसेंस जारी करने में कार्टेलाइजेशन की शिकायत का भी निर्देश दिया था।

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