अरविंद केजरीवाल ने सरकारी स्कूलों की योजना पर कार्य करने के लिए प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

अरविंद केजरीवाल ने सरकारी स्कूलों की योजना पर कार्य करने के लिए प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर देश के सभी सरकारी स्कूलों को एक साथ अगले पांच साल में शानदार बनाने के लिए योजना बनाने और उस पर कार्य करने की मांग की है। सीएम अरविंद केजरीवाल ने पत्र के जरिए पीएम से कहा है कि आपने महज 14,500 सरकारी स्कूलों को ठीक करने की योजना बनाई है। ऐसे तो पूरे देश के 10 लाख सरकारी स्कूलों को ठीक करने में 100 साल लग जाएंगे, तो क्या अगले 100 साल भी हम दूसरे देशों से पीछे रह जाएंगे? देश भर में 18 करोड़ बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं और 80 फीसद सरकारी स्कूलों की हालत कबाडख़ाने से भी ज्यादा खराब हैं। उन्होंने कहा है कि 1947 में हमसे बहुत बड़ी गलती हुई। देश आजाद होते ही सबसे पहले हमें भारत के हर गांव व मोहल्ले में शानदार स्कूल खोलने चाहिए थे, लेकिन हमने ऐसा नहीं किया। इससे भी अधिक दुख की बात यह है कि हमने अगले 75 साल भी अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने पर ध्यान नहीं दिया। मेरा आपसे आग्रह है कि सारी राज्य सरकारों को साथ लेकर देश के सभी 10 लाख सरकारी स्कूलों को अगले 5 साल में शानदार बनाने के लिए योजना बनाई जाए और उस पर कार्य किया जाए। दिल्ली में हमने बहुत कम पैसों में सरकारी स्कूल बहुत शानदार बना दिए। राष्ट्र निर्माण के इस कार्य में हम पूरी तरह आपका सहयोग करेंगे। अरविंद केजरीवाल ने देश के सभी सरकारी स्कूलों को एक साथ अगले 5 साल में शानदार बनाने के संबंध में पत्र लिखा है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने पत्र में लिखा है कि मुझे मीडिया से पता चला है कि केंद्र सरकार ने देश भर में 14,500 स्कूलों को अपग्रेड करने की योजना बनाई है। ये बहुत अच्छी बात है। पूरे देश में सरकारी स्कूलों की हालत बहुत खराब है। उनको अपग्रेड और आधुनिक बनाने की बहुत जरूरत है। अरविंद केजरीवाल ने आगे लिखा है कि देश भर में रोज 27 करोड़ बच्चे स्कूल जाते हैं। इनमें लगभग 18 करोड़ बच्चे सरकारी स्कूलों में जाते हैं। देश में 80 फीसद से ज्यादा सरकारी स्कूलों की हालतल किसी कबाडख़ाने से भी ज्यादा खराब है। अगर करोड़ों बच्चों को हम ऐसी शिक्षा दे रहे हैं, तो सोचिए भारत कैसे विकसित देश बनेगा? अरविंद केजरीवाल ने पत्र में लिखा है कि 1947 में हमसे बहुत बड़ी गलती हुई। देश आजाद होते ही सबसे पहले हमें भारत के हर गाँव और हर मोहल्ले में शानदार सरकारी स्कूल खोलने चाहिए थे। कोई भी देश अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिए बिना तरक्की नहीं कर सकता। 1947 में हमने ऐसा नहीं किया। ज़्यादा दु:ख की बात यह है कि अगले 75 साल भी हमने अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने पर ध्यान नहीं दिया। क्या भारत अब और वक्त बर्बाद कर सकता है? अरविंद केजरीवाल ने लिखा है कि आपने केवल 14,500 सरकारी स्कूलों को ठीक करने की योजना बनाई है, जबकि देश भर में 10 लाख से ज्यादा सरकारी स्कूल हैं। ऐसे तो सारे सरकारी स्कूलों को ठीक करने में 100 साल से भी ज्यादा लग जाएंगे, तो क्या अगले 100 साल भी हम दूसरे देशों से पीछे रह जाएँगे? देश के हर सरकारी स्कूल में शानदार शिक्षा की व्यवस्था के बिना हमारा देश विकसित देश नहीं बन सकता।
अरविंद केजरीवाल ने लिखा है कि देश के 130 करोड़ लोग अब और रुकने के लिए तैयार नहीं हैं। सब लोग चाहते हैं कि भारत दुनिया का नम्बर वन देश बने, भारत एक अमीर देश बने, भारत एक सर्वश्रेष्ठ और शक्तिशाली देश बने। इसलिए मेरा आपसे आग्रह है कि 14,500 की बजाय सभी 10 लाख सरकारी स्कूलों को शानदार बनाने की योजना बनाई जाए। इसमें सभी राज्य सरकारों को साथ लिया जाए और अगले पांच वर्षों में इसे कार्यान्वित किया जाए, सारा देश यही चाहता है। पत्र के अंत में  अरविंद केजरीवाल ने लिखा है कि दिल्ली में हमने बहुत कम पैसो में सरकारी स्कूल बहुत शानदार बना दिए। राष्ट्र निर्माण के इस कार्य में हम पूरी तरह आपका सहयोग करेंगे।

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