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शराब को लेकर कोहराम

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विगत एक महीने से अधिक समय से पूरी दुनिया के साथ भारत में भी कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने की खातिर लाॅक डाउन रखा गया था। जिसके चलते शराब के शौकीनों के हलक सूख गये थे लेकिन जैसें ही केन्द्र सरकार ने राज्यों को कोविड -19 लॉक डाउन में शर्तों के साथ ढील देने के नये दिशा निर्देश जारी किए।राज्यों ने सबसे पहले दूसरी जरूरी चीजों के साथ ही अपनी आर्थिक सेहत को भी ध्यान में रखते हुए शराब और खनन जिन से सरकारों को अधिकतम राजस्व प्राप्त होता है। अधिकांश सभी प्रदेशों ने प्राथमिकता के आधार पर खोलने का फैसला लिया है क्योंकि बीते एक महीने के लम्बे लाॅक डाउन की अवधि के दौरान राज्यों की आर्थिक स्थिति पर निश्चित रूप से व्यापक असर पड़ा है और कई राज्यों की सरकारों ने अलग अलग माध्यम से अपनी आर्थिकी सुधारने के दिए कई प्रयास किए हैं लेकिन भारत में राज्यों की सरकारों के पास अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए शराब और खनन दो सबसे महत्वपूर्ण राजस्व की कमाई के क्षेत्र हैं। वहीं अन्य राज्यों में दिल्ली देहरादून असम आदि कई राज्यों में हैरान करने वाली तस्वीरें सामने आई हैं।

दिल्ली में शराब की दुकानों पर कई जगह डेढ डेढ किलोमीटर लम्बी लाइने लग गई। शराब खरीदने के इच्छुक लोग आज शराब की दुकानें खुलते ही सबसे पहले शराब की दुकानों की ओर भागे तथा इन शराब की दुकानों में उमड़ी डेढ डेढ किलोमीटर लम्बी लाइनों ने स्थानीय पुलिस प्रशासन के हाथ पांव फुलवा दिए हालत यह थी कि हर एक व्यक्ति को शराब खरीदनी थी और इन हालातों में शराब की दुकानों पर अफरातफरी मचनी शुरू हो गई जिससे शोसल डिस्टेंस जैंसी आवश्यक शर्तों की धज्जियां उड़ने लगी। आनन फानन में पुलिस प्रशासन को इन शराब की दुकानों को फिलहाल बंद करने का निर्णय लेना पड़ा। भारत की राजधानी दिल्ली सहित देश के अलग अलग भागों से आ रही इस प्रकार की तस्वीरें हैरत में डाल देती हैं कि भारत में लोग शराब पीने को लेकर कितने आतुर रहते हैं तथा देश में करोड़ों लोग हैं  शराब जिनकी जिंदगी का प्रमुख हिस्सा बन चुका है। ये लोग बिना शराब पीने के रह हक नही सकते हैं इस प्रकार के लोगों की जिंदगी में शराब आदत बन चुकी होती है तथा बिना शराब के ये लोग बेचैन हो उठते हैं।

खैर ये तो बात हुई शराब के चाहने वालों की लेकिन अगर हम बात करें राज्यों में सरकार को आखिर शराब से किस तरह का मोटा मुनाफा होता है तो इसे इस रूप में भी समझा जा सकता है कि शराब वस्तु एवं सेवाकर के दायरे मे नही आती और राज्यों की सरकारें अपनी इच्छा के अनुसार इन पर अधिक अधिभार लगाकर मोटा मुनाफा कमाते हैं तथा अपनी आर्थिक सेहत को तंदूरस्त रखने के लिए शराब से प्राप्त आय बहुत बड़ा स्रोत होता है। अतः कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने की खातिर लागू एक महीने के लगभग के समय अंतराल के बाद लाॅक डाउन से राहत रूपी छूट में राज्य सरकारों ने सबसे पहले आपनी आर्थिकी बढाने के उपक्रम शराब और खनन को छूट देने में पहले स्थान पर रखा है और हो भी क्यों ना जिस शराब के लिए लोग अपने धन अपने बच्चों की फीस परिजनों की दवाइयों की जगह शराब को इन पर वरीयता देते हुए हर हाल में मंहगी शराब पीते हों और इस शराब को गटकने के लिए घर की सम्पत्ति जर जेवर घर की शांति सब गिरवी रख देते हों, जिस शराब ने हजारों परिवारों को घर से सड़क पर ला दिया हो, जिस शराब की एक अदद बोतल को पाने के लिए दिल्ली की सड़कों पर डेढ-डेढ किलोमीटर की लम्बीं लाइन लग जाती है तो निश्चित रूप से यह शराब राजस्व कमाने का सबसे प्रमुख आधार तो होगा ही।

                                                               ||विभू ग्रोवर||

 

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