लापरवाही से बचने की जरूरत

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कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने की खातिर केन्द्र सरकार द्वारा लागू राष्ट्रव्यापी लाॅक डाउन को एक महीने से भी अधिक का समय हो चला था और सरकार के पास लाॅक डाउन में राहत कहें अथवा ढील देने के अतिरिक्त कोई चारा शेष नही बचता है क्योंकि लम्बें राष्ट्रव्यापी लाॅक डाउन के चलते केन्द्र तथा राज्यों के पास आर्थिक संशाधनों की किल्लत बढती जा रही थी इसके अतिरिक्त देश मे आबादी का एक बहुत बड़ा तबका वह है जो महीने भर में महज इतनी कमाई कर पाता है कि अपने परिवार को महज दो जून की रोटी उपलब्ध करा सके इस बड़ी आबादी वाले तबके के पास ना तो कोई बैंक बैलेंस होता है और ना कोई और साधन कि बुरे वक्त में कोई जमापूंजी हो जो विकटतम हालात जैसें कि विश्वव्यापी महामारी का रूप ले चुके वर्तमान हालातों में कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने की खातिर केन्द्र सरकार द्वारा घोषित लाॅक डाउन। असल मे लगभग तीस चालीस प्रतिशत देश की आबादी के लोग अपनी महीने भर की हाड़ तोड़ मेहनत के बाद महज इतने चंद रुपयों की कमाई कर पाते हैं कि परिवार को दो जून की रोटी की ही व्यवस्था बामुश्किल से हो पाती है इसमें दिहाड़ी मजदूर तथा असंगठित क्षेत्र के मजदूर अथवा ठेकदारी प्रथा के माध्यम से काम करने वाले बेहद गरीब तबके के लोग हैं।

अब इन लोगों को लाॅक डाउन के कारण जब सभी कार्यक्षेत्रों में काम रुक गया तो इनकी आय भी बंद हो गई अगली पिछली जमापूंजी तो होती नही तो दिक्कतें भी बड़ी होती हैं। अतःसूत्रों के अनुसार कुछ राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने प्रधानमंत्री के साथ मीटिंग में इन लोगों की दिक्कतों को सामने रखा। वही इसके साथ साथ केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों के खजाने पर इस एक महीने के लम्बें लाॅक डाउन ने बेहद विपरीत असर डाला है अंतर देशीय तथा राज्यों के बीच पूर्ण बंदी के चलते रैवेन्यू ठप्प हो चला था तथा सूत्रों से छन छन कर आ रही खबरों पर यकीन करें तो कई राज्यों ने केन्द्र सरकार से अनुरोध किया था कि लाॅक डाउन में राहत के दौरान शराब और खनन को खुलवाने का आदेश दें जिससे कि राज्यों की एक महीने की लम्बीं अवधि के लाॅक डाउन के चलते कमजोर हो चुकी आर्थिक हालत को सुधारा जा सके। लेकिन जैसें ही केन्द्र सरकार ने राज्यों को लाॅक डाउन मे छूट के साथ शराब और खनन खुलवाने की छूट दी। कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने की खातिर केन्द्र सरकार के निर्देशों जिसमें आवश्यक सामाजिक दूरी के अनुपालन करने के साथ ही सार्वजनिक जगहों पर मास्क पहनने आदि दिशा निर्देश जारी किए गये थे लेकिन शराब की दुकानों के बाहर लगी तीन तीन किलोमीटर लम्बी शराब प्रेमियों की भीड़ ने सोशल डिस्टेंस के सारे नियम कायदे बिगाड़ कर रख दिए बड़े बड़े शहरों से लेकर छोटे छोटे कस्बों मे यह नजारे आम रहे।

दूसरी और शहरों मे भी लोग अब सोशल डिस्टेंस की चिंता नही कर रहे सब्जी फड़ से लेकर किराना स्टोरों पर अमूमन यही हालात हैं। अब जबकि देश मे कोरोना संक्रमण के मामले भले ही सीमित संख्या मे ही सही बढ रहे हैं इन हालातों में लोगों की जिम्मेदारी अधिक बन जाती है कि किस तरह कोराना वायरस संक्रमण के प्रसार को और फैलने से रोका जाए दूसरा ग्रीन जोन से लेकर दूसरे क्षेत्रों मे भी बाजारों के खुलने मे छूट की अवधि अधिकतम छः घण्टे तक रखी जानी चाहिए असल मे लोग दो बातों को लेकर अपने मन में धारणा बना रहे है जिसमें पहला है कि शायद कोरोना वायरस का संक्रमण अब लगभग निष्प्रभावी हो चुका है तथा दूसरा यह कि इसका डर इतना है नही जितना कि पेश किया गया लेकिन वास्तविकता इसके ठीक उलट है एक उदारहण अमेरिका का ही लिया जा सकता है जहां लगभग साठ हजार के आस पास लोग कोरोना वायरस के संक्रमण से मर चुके हैं और लगभग दो लाख लोग इस विषाणु से संक्रमित हैं पूरी दुनिया में लगभग डेढ लाख से अधिक लोगों ने इस कोरोना वायरस के संक्रमण से जान गंवाई है भारत मे भी कोरोना वायरस से संक्रमितों का आंकड़ा चालीस हजार के आस पास है।

यद्यपि बीस हजार से अधिक लोग इस विषाणुजनित बीमारी से ठीक हो भी चुके हैं लेकिन भारत मे भी कोरोना वायरस संक्रमण से मरने वालों का आंकड़ा 1300 सौ से कहीं ऊपर है। अतः लोगों को यह बात बेहद गंभीरता से सोचनी होगी कि लाॅक डाउन में छूट आवश्यक्ता को ध्यान में रखकर दी गई है क्योंकि जान के साथ जहाॅन बचाना भी जरूरी है लेकिन यह भी बेहद ध्यान देने की बात है कि केन्द्र सरकार तथा राज्यों की सरकारों की बेहतर रणनीति से कोरोना वायरस का संक्रमण प्रसारित होने से रोका गया है। संक्रमण का खतरा अभी टला नही है जब तक सरकार की ओर से कोरोना वायरस के खतरे के समाप्त होने की औपचारिक पुष्टि नही हो जाती प्रत्येक व्यक्ति कोरोना वायरस को लेकर सरकार द्वारा जारी निर्देशों का पालन करे तभी कोरोना के खिलाफ यह लड़ाई जीती जा सकेगी।विभू ग्रोवर।।

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