राहत के साथ सावधानी की जरुरत

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केन्द्र सरकार ने लाॅक डाउन को हालांकि दो सप्ताह आगे बढा दिया है। लेकिन देश की आर्थिक सेहत को बेहतर बनाये रखने और उद्योग जगत कृषि क्षेत्र तथा दैनिक दिहाड़ी मजदूरों की स्थिति को आधार बनाकर लाॅक डाउन में उन चिन्हित क्षेत्रों जहां कोरोना वायरस संक्रमण नही है, उन क्षेत्रों में धीरे-धीरे स्थिति सामान्य करने के लिहाज से छूट दी जानी प्रारम्भ हुई हैं। कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने में हिमालयी राज्यों की भी अच्छी भूमिका रही है। लेकिन अब जबकि उत्तराखण्ड के साथ ही दूसरे राज्य अलग अलग प्रदेशों में फंसे अपने राज्य के मूल निवासियों को वापस लाने के अभियान में जोर शोर से जुट गये हैं तो कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर चिंता यहां अधिक हो जाती है, और वह भी तब जबकि कोरोना वायरस के संक्रमण के लक्षण कई बार सामने प्रकट ही नही हो रहे हैं, और लोग इस कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमित भी हैं। जिसके कुछ उदारहण दिल्ली में ही देखने को मिले थे, जहां एक सरकारी सहायता केन्द्र में सहयोग कर रहा व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित था किंतु उसके शरीर पर बाहरी रूप से कोई भी लक्षण प्रदर्शित नही हो रहे थे।

विश्व स्वास्थ्य संगठन से जुड़े एक डाॅक्टर ने बताया कि कोरोना वायरस एक बहुरूपिया की तरह की प्रकृति प्रदर्शित कर रहा है। कभी इसके संक्रमण के लक्षण छः दिन में प्रकट हो जाते हैं वहीं कभी 28 दिन तक भी व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बावजूद शरीर पर उसके प्रभाव के लक्षणों से बचा रहता है। कुछ केसों मे शरीर के पांव पर गहरे निशान भी इस संक्रमण के लक्षणों मे शामिल रहा है। राज्य सरकारें अब हालातों की समीक्षा के बाद दूसरे राज्यों में फसें लोगो जिनमें कि अधिकांश लोग वे हैं जो कि कम आर्थिकी के हैं। उन्हें सकुशल आवश्यक सामाजिक दूरी का अनुपालन करवाते हुए उनके गृहक्षेत्रों में भेजना एक बहुत बड़ी चुनौती होगी। दूसरा थर्मल स्कैनिंग केवल शरीर के तापमान की जांच करता है इसके परिणाम का कोरोना वायरस के संक्रमण से कोई सीधा मतलब नही है। भारत क्या दुनिया भर में अभी भी कोरोना वायरस से कितने लोग संक्रमित हैं इसकी कोई सटीक जानकारी नही है, क्योंकि दुनिया भर में दस प्रतिशत से भी कम लोगों का संक्रमण परीक्षण हुआ है। वहीं सरकार की अब असल चिंता अपने आर्थिक हालातों को सुधारने के साथ ही स्थितियों को सामान्य करने की ओर बढना है तथा इसके लिए सरकार विभिन्न मोर्चों पर काम कर रही है। जिसमें औद्योगिक उत्पादन को शुरु करवानाए राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ी परियोजनाओं को फिर से शुरु करना जिसमें केन्द्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गड़करी ने कहा कि सड़क परियोजना में पुनः कार्य करने की कवायद लगभग शुरु कर दी गई है। वहीं राज्य अपने राजस्व की बढोत्तरी के लिए शराब और खनन को फिर से खोलने की प्रक्रिया में शर्तों के साथ छूट देने की कवायध कर चुके हैं। अगर बात उत्तराखण्ड की ही करें तो कम संशाधनो वाले इस हिमालयी राज्य में शराब से अच्छी खासी रकम राजस्व के रूप मे जुटाई जाती है। इसके अतिरिक्त खनन से भी अच्छा राजस्व हासिल होता है। निश्चित रूप से एक महीने के लगभग हो चले इस लाॅक डाउन ने अर्थव्यवस्था को भारी क्षति पंहुचाई है। कमजोर आर्थिकी के लोगों के सामने वर्तमान हालात के साथ ही भविष्य की चिंताये भी हैं। सरकार इन कमजोर आर्थिकी के लोगों को उनके घरों को वापस तो ला रही है पर आगे के हालात क्या होगें ये ना तो सरकार बेहतर ढंग से समझती है ना ही घर वापसी के इच्छुक लोग। उत्तराखण्ड सरकार की मानें तो दूसरे राज्यों से वापस लौटने के लिए आवेदन करने वाले लोगों की संख्या लगभग 87 हजार है तथा इनमें से अधिक लोग उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों के प्रवासी नागरिक बताये जा रहे हैं। अब अगर जैसें तैसें इन 87 हजार लोगों को जो दूसरे राज्यों में फंसे है उनके गृह क्षेत्रों मे लाया जाता है और ईश्वर ना करे लेकिन अगर कोरोना वायरस संक्रमण से हालात बिगड़ते हैं तो फिर स्थिति और खराब होगी। वहीं सभी राज्यों की सरकारों पर जनता का दबाव काम कर रहा है तथा राज्यों की सरकारें कहीं ना कहीं दबाव के चलते यह जानते हुए भी कि दूसरे राज्यों से आने वाले प्रवासियों की वापसी से कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार को लेकर खतरा भी है फिर भी अपने प्रवासियों को घर वापस लाकर उन्हे सहूलियत देने के उपक्रम में सभी प्रदेशों की सरकारें यह कदम उठा रही हैं क्योकि उनके पास अब अधिकांश विकल्प भी इसको लेकर नही है एबस सावधानी ही एक मात्र विकल्प के रूप में बचता है चुनौतियां अब शुरु होनी प्रारम्भ हुई हैं बेहतर रणनीति से इनका सामना हो सकेगा।

।।विभू ग्रोवर।।

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