नेपाल को भड़का रहा है चीन

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भारत की विश्व स्तर पर बढ़ती शाख से चीन बुरी तरह बौखलाया हुआ है तथा भारत को कमजोर करने के लिए वह भारत के खिलाफ अब भारत के पड़ोसी देशों को भड़काने का कार्य कर रहा है। एक ओर चीन अभी विश्व की सबसे ऊंची चोटी मांउट एवरेस्ट के पास संचार टावर स्थापित करने तथा एवरेस्ट को चीन का भूभाग बताने की साजिश करता नजर आ रहा है, वहीं दूसरी और वह नेपाल को भारत के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा हैं। चीन ने पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले भारतीय भू- भाग पर चीन के साथ मिलकर पाकिस्तान चीन आर्थिक गलियारा बना रखा है, जिस पर चीन ने बहुत बड़ी धनराशि खर्च कर रखी है वहीं जब से केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में जोर देकर कहा था कि पाक अधिकृत कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है तथा हर हाल में हम उसे वापस लेकर रहेंगे तब से पाकिस्तान बुरी तरह से घबरा रखा है तथा चीन पूरी दुनिया में अपने वुहान स्थित वायरोलॉजी संस्थान से कथित रुप से लीक हुए , कोरोना वायरस के दुनिया भर में प्रसार तथा उसमें अपनी भूमिका के चलते फंसता जा रहा है। चीन को पता है कि उसकी हरकतों की सजा दुनिया के देश देर सवेर उसे देने वाले हैं इसलिए वह कोरोना वायरस संक्रमण से दुनिया का ध्यान बांटने का असफल प्रयास कर रहा है।

चीन को इसके साथ ही अपने आर्थिक गलियारे की सुरक्षा की चिंता भी है। चीन ताइवान, वियतनाम के साथ भी जापान आदि देशों के साथ लगातार विवाद चल रहे हैं अपनी साम्राज्यवादी नीतियों को बढ़ावा देने के लिए चीन ताइवान जैसें छोटे देश को धमकाने का लगातार प्रयास कर रहा है तो इसके साथ ही वह भारत के पड़ोसी देश म्यांमार, भूटान तथा नेपाल को भारत के खिलाफ लगातार भड़काने की साजिश रचता है। यद्यपि भूटान और म्यांमार ने चीन की साजिश का हिस्सा बनने से साफ इनकार कर दिया है, लेकिन नेपाल में जब से राजशाही समाप्त हुई तथा वहां पर वामंपथ का प्रसार प्रसार बढ़ा है तथा नेपाल की सत्ता मे कम्युनिष्टों का प्रवेश हुआ तब से वहां लगातार भारत के खिलाफ साजिश और भारत विरोधी माहौल बनाने का प्रयास प्रारम्भ हुआ है। चीन नेपाल के कंधे पर बंदूक रखने का काम कर रहा है और उसे भारत के खिलाफ हथियार की तरह उपयोग में ला रहा है, चीन का मकसद नेपाल को बहुत बड़ी धनराशि कर्ज के रूप मे देकर उसे पूरी तरह से अपने जाल में उलझाने की है जिससे कि चीन जो चाहे नेपाल से बुलवाले अथवा चीन के इशारों पर नेपाल नाचने के लिए विवश हो जाए और नेपाल के वर्तमान हालात देखकर यही लग रहा है कि नेपाल की सत्ता के शीर्ष पर बैठे व्यक्ति मजबूरी में ही सही चीन को खुश करने वाली भाषा बोलते दिख रहे हैं।

ताजा घटनाक्रम में नेपाल के प्रधानमंत्री के0पी0 शर्मा ओली ने बयान दिया कि भारतीय भूभाग कालापानी तथा लिपुलेख हमारे आर्थात नेपाल के क्षेत्र हैं वहीं नेपाल के एक संगठन ने लिपुलेख मे नेपाल का झण्डा फहराने और इसको लेकर नेपाल मे यात्रा शुरु की है। वहीं नेपाल के प्रधानमंत्री के0 पी0 शर्मा ओली ने कहा कि भारत ने लेपुलेख तथा कालापानी मे सेना तैनात कर उसे विवादित बनाया है। उन्होनें कहा कि भारत और नेपाल की दोस्ती बनाये रखने के लिए यह आवश्यक है कि पहले ऐतिहासिक विवादित मुद्दों का समाधान निकाला जाए। वहीं नेपाल के प्रधानमंत्री के• पी• शर्मा ओली ने एक बार फिर भारत के खिलाफ बयानबाजी की है नेपाली प्रधानमंत्री ओली ने कहा कि चीन के मुकाबले भारत का वायरस अधिक खतरनाक है नेपाली प्रधानमंत्री के इन बयानों के पीछे सीधे तौर पर चीन का भारत के खिलाफ नेपाल को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की योजना हो सकती है। असल में भारतीय सेना पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर पर नियंत्रण को लेकर कई बार बयान दे चुकी है भारत के गृहमंत्री अमित शाह संसद में दो टूक कह चुके हैं कि पाक के अवैध कब्जे वाला कश्मीर का क्षेत्र भारत का भू भाग है तथा भारत उसे हर हाल मे वापस लेगा। पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर में चीन ने बड़े पैमाने पर निवेश कर रखा है और वहां भारत के सम्भावित हमले से वह घबरा रहा है तथा भारत को उलझाने के लिए वह नेपाल को इस्तेमाल करने की कुटिल चाल चल रहा है।

।।विभू ग्रोवर।।

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